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Tuesday, 4 November 2014

रकीबुल की कॉल डिटेल्स मे पूर्व MP से एक महीने में 26 बार बात, राजभवन से जुड़े तार

रांची - नेशनल लेवल की शूटर तारा सहदेव को ‘लव जिहाद’ के जाल में फंसाने के आरोपी रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान के हाईप्रोफाइल संबंधों का पहला ठोस सबूत सामने आया है। रकीबुल के एक मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल्स भी मीडिया के हाथ लगे हैं, जिसमें उसके मंत्रियों, नेताओं, आईएएस अधिकारियों, जजों आदि हाई प्रोफाइल लोगों से अनगिनत बार बात होने की जानकारी सामने आई है। दिलचस्प है कि कल अपने संबंधों पर सफाई दे रहे पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी से ही रकीबुल ने सिर्फ इस नंबर से एक महीने के अंदर २६ बार बात की है। बता दें कि पूरे देश में लव जिहाद से जुड़े मामले सामने आने लगे हैं।
एक मामूली-सा एनजीओ चलाने वाले रकीबुल हसन के घर से छापेमारी के दौरान ३६ सिम मिले थे, जबकि दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी के समय भी पुलिस ने छह सिम बरामद किया था। होटल में एक मामूली वेटर का काम करने वाले कोहली के कुछ ही सालों में करोड़पति बनने की कहानी भी इन्हीं संबंधों में छिपी है। ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि वह अपने घर पर जजों के सामने आरोपियों को बैठा कर डील करवाया करता था।
कोहली के जिस सिमकार्ड का डिटेल्स मीडिया के हाथ लगा है, उसका नंबर  ८१०२७७७७७१ है। इस मोबाइल पर जुलाई और अगस्त में कुल ९६२ इनकमिंग-आउटगोइंग कॉल रिकॉर्ड किए गये हैं। कॉल डिटेल्स से पता चलता है कि कोहली के रिश्ते राजभवन के एडीसी शम्स तबरेज से लेकर झारखंड के प्रोजेक्ट बिल्डिंग में बैठनेवाले सचिव और प्रधान सचिव तक रहे हैं। कोहली के अब तक मिले कुल ४२ सिमकार्ड्स के डिटेल खुलने पर कई बड़े लोग बेनकाब हो सकते हैं।

कॉल डिटेल में खुले रिश्ते

१. मो. मुश्ताक अहमद, रजिस्ट्रार विजिलेंस, झारखंड हाईकोर्ट
८ जुलाई से २० अगस्त तक १६ बार हुई बातचीत।
२. सुरजीत कुमार (डीएसपी, नगर उंटारी)
६ जुलाई से ६ अगस्त तक १३ बार बातचीत।
३. हाजी हुसैन अंसारी, झारखंड के कैबिनेट मंत्री 
२९ से १ अगस्त तक दो बार और पीए से १ से ९ अगस्त तक सात बार बातचीत।
४. इंद्रदेव मिश्रा (यूपी बार काउंसिल के सदस्य)
२ जुलाई से ९ अगस्त तक १० बार हुई बातचीत।
तारा सहदेव के अनुसार, इनकी मदद से यूपी के कई कोर्ट से रंजीत सिंह कोहली के तार जुड़े
१. वीणा मिश्रा, न्यायिक सेवा ( देवघर, झारखंड )
५ जुलाई से ५ अगस्त तक २० बार हुई बातचीत।
तारा सहदेव का कहना है कि ये ब्लेयर अपार्टमेंट में आयी थीं।
२. रितोष उपाध्याय (आइएफएस, संयुक्त सचिव)
४ जुलाई से ११ अगस्त तक २१ बार बातचीत।
३. इंदर सिंह नामधारी, विधानसभा के पूर्व स्पीकर और चतरा के पूर्व सांसद
२ जुलाई से ६ जुलाई तक तीन बार और उनके पीए से १ जुलाई से ८ अगस्त तक २६ बार बातचीत।
४. सैयद मतलूब हुसैन (सिविल जज, सरायकेला-खरसावां)
१५ जुलाई से ९ अगस्त तक २ बार हुई बातचीत।
स्त्रोत : दैनिक भास्कर

१ सितंबर २०१४, भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी, कलियुग वर्ष ५११६

‘लव जिहाद': पूर्व सांसद ने मानी भाजपाई को बेल दिलाने के लिए रकीबुल की मदद लेने की बात

रांची - ‘लव जिहाद’ के आरोपी रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन के रिश्ते कई जजों से रहे हैं। पुलिसिया पूछताछ में उसने इस बात को स्वीकार कर लिया है। उसने यह भी स्वीकार कर लिया है कि कई लड़कियों से उसकी अच्छी दोस्ती रही है। जजों से दोस्ती की बदौलत उसने कई बड़े काम करवाए। झारखंड विधानसभा के अध्‍यक्ष और पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी ने तो रकीबुल की मदद से एक भाजपाई को जमानत दिलवाने की बात कबूल भी की है।
कोर्ट में रकीबुल की पेशी आज
रकीबुल को रांची पुलिस सोमवार को कोर्ट में पेश करेगी। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि रकीबुल की रिमांड अवधि बढ़ाने के लिए कोर्ट से आग्रह किया जाएगा, ताकि पूछताछ और आगे बढ़ाई जा सके।
रकीबुल ने पूछताछ के दौरान यह भी स्वीकार किया है कि जजों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के अलावा उनके खिलाफ चलने वाले मामलों में क्लीन चिट दिलाने और इस एवज में जमानत दिलाने की पैरवी वह करता था। कई गंभीर अपराध के अभियुक्तों को कोहली के इशारे पर अब तक छोड़ा जा चुका है। कोहली ने यह भी स्वीकार किया कि झारखंड ही नहीं, कई अन्य राज्यों के जजों से उसकी गहरी दोस्ती है।
पूर्व सांसद ने मानी पैरवी की बात
तारा शाहदेव प्रकरण में पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि उन्‍होंने रंजीत उर्फ रकीबुल की मदद से एक व्‍यक्ति को तीन माह के पैरोल पर रिहा करवाया था। नामधारी ने रंजीत उर्फ रकीबुल के विवाह में खुद के शामिल होने पर सफाई भी दी है। उनके इस खुलासे के बाद झारखंड की न्‍यायपालिका पर कई सवाल उठने लगे हैं। तारा-रकीबुल प्रकरण में पहले से ही न्‍यायिक पदों पर बैठे महत्‍वपूर्ण लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। एक प्रेस बयान में नामधारी ने कहा कि उनका और रंजीत उर्फ रकीबुल का संबंध उतना ही है, जितना एक ‘रसीदी टिकट’ पर लिखा जा सकता है।
नामधारी ने बताया कि चतरा का सांसद होने के नाते वहां के कई भाजपा नेताओं ने मुझसे आग्रह किया कि मैं एक पुराने भाजपा नेता प्रवीण चंद्र पाठक (एक हत्‍या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे) के परिजनों से मिलूं। उन लोगों के अनुरोध पर उस परिवार से मिला और उसकी जमानत का काम कोहली को सौंप दिया। कोहली ने वह काम कर दिया।
स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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