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Tuesday, 4 November 2014

रकीबुल हसन के फ्लैट से ३६ सिमकार्ड, १५ फोन आैर दो एयरगन बरामद

 
रांची - झारखंड के बहुचर्चित तारा शाहदेव प्रकरण में रिमांड पर लिए गए रकीबुल हसन खान उर्फ रंजीत सिंह कोहली की रिमांड का रविवार को आखिरी दिन है। पुलिस  रांची के उसके ठिकानों पर ले जाकर पूछताछ कर रही है। रकीबुल से ब्लेयर अपार्टमेंट स्थित फ्लैट का दरवाजा उसके सामने खुलवाकर वहां पूछताछ हुई। पुलिस को वहां से दो एयरगन, वीआईपी गाड़‍ि‍यों पर लगने वाली पीली बत्‍ती, एक प्रोजेक्टर, 36 सिमकार्ड, दो सीपीयू, 15 मोबाइल फोन, कई मोबाइल के खाली डिब्बे, एक पेन ड्राइव, चार प्रिंटर, शादी की सीडी और कोर्ट के दस्‍तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने रंजीत उर्फ रकीबुल के अशोक विहार स्थित किराए के मकान की भी तलाशी ली। रकीबुल ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शनिवार को रिमांड के दूसरे दिन उसने पुलिस को 45 से अधिक बड़े लोगों के नाम बताए, जिनसे उसकी अच्छी जान पहचान है। इनमें जज, अफसर और नेता शामिल हैं। उधर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने तारा शाहदेव से मुलाकात की और उन्हें एक लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विजिलेंस मुश्ताक अहमद थे रकीबुल के ‘सरकार’

रकीबुल ने पुलिस को बताया है कि झारखंड में उसके असल ‘सरकार’ हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विजिलेंस मुश्ताक अहमद ही थे और मुख्यालय दिल्ली था। मुश्ताक अहमद को ही वह सरकार शब्द से संबोधित करता था। रकीबुल ने कहा कि दिल्ली के इशारे पर झारखंड के किसी भी जिले के न्यायिक अधिकारी आसानी से कोई भी केस सुलझा देते थे। कोई भी बात नहीं काटता था। यही वजह है कि वह जल्द ही लखपति बन गया था। रुपए आने के स्रोत में कहीं कुछ रुकावट नहीं होती थी। जगन्नाथपुर थाना में शनिवार को रकीबुल से पूछताछ में आईबी, सीआईडी, स्पेशल ब्रांच और जिला पुलिस के अधिकारी शामिल थे।

डीएसपी रैंक के दो दर्जन अफसरों के नाम बताए

रकीबुल हसन खान ने पूछताछ में दो दर्जन पुलिस अधिकारियों के नाम बताए हैं। सभी पुलिस अफसर डीएसपी रैंक के हैं। डीएसपी स्तर के अधिकारियों में नव प्रोन्नत अफसरों की संख्या सबसे अधिक है। इनमें से कुछ अधिकारी रकीबुल के काफी करीबी माने जाते हैं। जबकि न्यायिक अधिकारियों में जिला जज और सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

मंत्रियों और आईएएस को भी पहुंचाई मदद

पुलिस के समक्ष रकीबुल ने शनिवार को कई खुलासा किए हैं। रकीबुल ने पुलिस को बताया कि किस तरीके से मंत्री और आईएएस को भी उसने मदद पहुंचाई। रकीबुल के अनुसार, मंत्री सुरेश पासवान का चालक आपराधिक मुकदमे का आरोपी था। मंत्री के अनुरोध पर ही रकीबुल ने उक्त चालक को मामले से बरी करा दिया। उस आपराधिक मुकदमा  की सुनवाई देवघर सिविल कोर्ट में लंबित चल रही थी।

आईएएस को मनोरंजन की सुविधा

उसने बताया कि राज्य के एक आईएएस जो साइंस एंड टेक्नॉलोजी के सचिव पद पर थे और बाद में वे अपर मुख्य सचिव बने। उस दौरान साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग में कई कार्य के लिए टेंडर निकला था।  सचिव ने उसे अपने विभाग से संबंधित ठेका मामले में लाभ दिलवाया था। इसके एवज में उसने सचिव के मनोरंजन की व्यवस्था कराने की बात कही है।

पूर्व सांसद ने भी ली थी मदद

चतरा के पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी को भी रकीबुल मदद पहुंचाने की बात बताई है। उसने कहा है कि सांसद का एक परिचित हत्या के आरोप में सजा पा चुका था। उसका मामला हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित था। सांसद का परिचित इस मामले में लगातार जेल में था। उस आरोपी को सांसद के अनुरोध पर रकीबुल ने कुछ ही दिनों में जेल से रिहा करा दिया।
स्त्राेत : दैनिक भास्कर

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