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Monday, 3 November 2014

तारा सहदेव ‘लव जिहाद’ : नौकरानी ने कहा – रकीबुल के घर आती थीं कई लड़कियां

रांची - रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन की शादी में तारा शाहदेव के परिचितों की संख्या काफी अधिक थी। यूं कहें कि विवाह स्थल लड़के वालों से भरा पड़ा था। निकाह के दिन भाभी के घर से कोई नहीं आया। निकाह क्या होता है, मैं जानती भी नहीं थी। वहीं निकाह के बारे में जानकारी मिली। रंजीत भइया के घर एक दाढ़ी वाले और एक सफेद पगड़ी वाले नेताजी आते थे। मैं उन्हें नाम से नहीं जानती, लेकिन बातचीत से पता चलता था कि दाढ़ी वाले बाबा कोई मंत्री हैं।पगड़ी वाले नेताजी भी काफी रोबदार लगते थे। भइया इनकी जमकर आवभगत करते थे। मुश्ताक अहमद नामक एक साहब का तो घर पर अक्सर आना जाना लगा रहता था। उन्हें मैं अच्छी तरह पहचानती हूं।”
यह कहना है रकीबुल के घर नौकरानी का काम करने वाली हरिमति का। १४ साल की हरिमति से दैनिक भास्कर संवाददाता ने उसके सिल्ली के हेसाडीह गांव जाकर बातचीत की। वह बातचीत के लिए सामने आने में थोड़ा सकुचा रही थी। समझाने पर वह बातचीत के लिए तैयार हो गई। प्रस्तुत है उससे बातचीत के प्रमुख अंश :dg event
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अलग-अलग लड़कियों के साथ आती थी रिचा
रिचा नाम की एक लड़की घर आती थी। तीन-चार बार उसे रंजीत भइया के घर पर देखा। हर बार उसके साथ अलग-अलग लड़की होती थी। भइया ने रिचा का एडमिशन किसी कॉलेज में करा दिया था। इसके बाद उसका घर आना ज्यादा बढ़ गया था। रिचा भइया को सर-सर कह कर बुलाती थी। भइया कहता था कि रिचा उसकी भाभी है, लेकिन रिचा के पति को हमलोगों ने कभी नहीं देखा। जानते हैं सर, भइया की बहुत बड़े-बड़े लोगों से दोस्ती थी। लाल, पीली बत्ती वाली गाड़ी से बड़े लोग उनसे मिलने आते थे। भइया के आने का कोई टाइम फिक्स नहीं था। कभी रात को एक-डेढ़ बजे आते थे, तो कभी फोन कर देते थे कि आज नहीं आएंगे।
शादी और निकाह में तारा के घर वाले शामिल हुए थे या नहीं?
भइया की शादी धूमधाम से हुई थी। उसमें भाभी के परिवार वालों की संख्या ज्यादा थी। भइया की तरफ से उनके दोस्त आदि ज्यादा थे। निकाह के दिन भाभी के घर से कोई नहीं आया। भाभी को कहा गया कि तीन बार कबूल, कबूल बोलो। इस घटना के बाद से ही भाभी उदास रहने लगीं। वह मायके लौटने का उपाय ढूंढ़ रही थीं।
रकीबुल के घर कौन-कौन लोग आते थे ? इन्हें आप पहचान सकती हो क्या?
एक दाढ़ी वाले और एक पगड़ी वाले नेताजी को घर पर दो-तीन बार देखा। भइया इनकी बहुत इज्जत करते थे। बाद में पता चला कि वे लोग मंत्री या बड़े आदमी हैं। मुश्ताक अंकल तो अक्सर आते थे। उन्हें अच्छी तरह पहचान सकती हूं। अन्य नेताओं को भी सामने से देखकर पहचान लूंगी। रोहित भइया भी घर आते थे। रंजीत भइया की उनसे काफी अच्छी दोस्ती है।
घर पर आपने कभी मारपीट करते देखा क्या?
एक दिन भाभी (तारा शाहदेव) के शरीर पर जख्म का निशाना देखा। पूछने पर उन्होंने बताया कि भइया ने मारपीट की है। उनके गाल, पीठ और होंठ पर चोट के निशान थे। मुझे तो लगता है कि मारपीट की वजह से ही भाभी घर छोड़कर चली गई।

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